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।। इंस्टा क्वीन या वसूली की मशीन? वर्दी वालों को बनाया मोहरा, आम आदमी को मारी गोली।।

।। रील वाली रानी, वसूली वाली नानी: 7.5 लाख फॉलोअर्स, हाथ में पिस्टल और 150 शिकार।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। रील की चमक या अपराध की धमक: इंस्टाग्राम क्वीन के ‘लेडी डॉन’ बनने की खौफनाक दास्तान।।

शुक्रवार 23 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

गोरखपुर।। सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में ‘लाइक्स’ और ‘फॉलोअर्स’ की भूख इंसान को किस हद तक ले जा सकती है, गोरखपुर का ताजा ‘अंशिका कांड’ इसका ज्वलंत और डरावना उदाहरण है। साढ़े सात लाख फॉलोअर्स, लग्जरी गाड़ियां, रसूखदारों के साथ तस्वीरें और फिर एक दिन सरेराह हाथ में पिस्टल लेकर युवक को गोली मार देना—यह किसी फिल्मी वेब सीरीज की कहानी नहीं, बल्कि शहर के सिंघड़िया चौराहे की हकीकत है।

💫दबदबे की सनक और ब्लैकमेलिंग का धंधा

अंशिका उर्फ अंतिमा सिंह, जिसकी उंगलियां कभी मोबाइल स्क्रीन पर रील्स बनाने के लिए चलती थीं, अब पुलिस की सलाखों के पीछे है। जांच में जो खुलासा हुआ है वह सभ्य समाज के माथे पर पसीना लाने वाला है। महज 7.5 लाख फॉलोअर्स के दम पर उसने अपना जो ‘साम्राज्य’ खड़ा किया था, उसकी बुनियाद ब्लैकमेलिंग और वसूली पर टिकी थी। पुलिस का दावा है कि वह अब तक एक दरोगा समेत करीब 150 लोगों को अपना शिकार बना चुकी है। झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देना उसका हथियार था और काली स्कॉर्पियो उसकी ‘लेडी डॉन’ वाली छवि का हिस्सा।

💫वर्दी पर भारी पड़ गई रील की रानी

हैरानी की बात यह है कि इस जाल में सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि कानून के रखवाले भी फंसे। सूत्रों की मानें तो शहर के एक थाना प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मी इसके चंगुल में आ चुके थे। बदनामी के डर से खाकी ने समझौता करना बेहतर समझा, जिससे इस युवती के हौसले बुलंद होते गए। जब पुलिस ने गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि यह गिरोह दिल्ली से किराए की थार चोरी करने और उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर शहर में रौब गांठने का भी आदि था।

💫सोशल मीडिया: वरदान या जहर?

अंशिका के परिवार ने उसके महंगे शौक और संदिग्ध गतिविधियों के कारण उससे किनारा कर लिया था। लेकिन सोशल मीडिया ने उसे वो ‘फेक लाइफस्टाइल’ दी, जिसकी आड़ में वह अपने काले कारनामों को छिपाती रही। 12 हजार रुपये वसूलने के बाद 50 हजार की और मांग करना और मना करने पर सीधे गोली चला देना यह दर्शाता है कि कानून का खौफ इस कथित ‘इंफ्लुएंसर’ के मन से पूरी तरह खत्म हो चुका था।

💫अब उठ रहे हैं गंभीर सवाल

यह घटना सिर्फ एक गिरफ्तारी का मामला नहीं है, बल्कि हमारे समाज और सिस्टम के लिए चेतावनी है:-

क्या सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमक-धमक ही किसी के चरित्र का पैमाना है?

💫 कैसे एक युवती लंबे समय तक पुलिस और सफेदपोशों को ब्लैकमेल करती रही और किसी ने मुंह नहीं खोला?

💫 फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियां शहर में ‘फर्राटा’ भरती रहीं, तब पुलिस की चेकिंग कहां थी?

गोरखपुर पुलिस ने अब इस ‘लेडी डॉन’ के पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू किया है। उम्मीद है कि जांच की आंच उन ‘सफेदपोशों’ तक भी पहुंचेगी जो अब तक इस गिरोह को संरक्षण देते रहे या डर के मारे चुप्पी साधे रहे।

नतीजा साफ है: रील की दुनिया में मिली शोहरत अगर दिमाग पर हावी हो जाए, तो वह इंसान को सेलिब्रिटी नहीं, अपराधी बनाती है। आज अंतिमा के पास न वो फॉलोअर्स काम आएंगे और न ही वो रसूखदार दोस्त, जिनके साथ वह रील्स बनाया करती थी।

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